दुल्हन की तरप - Printable Version

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RE: दुल्हन की तरप - rajbr1981 - 14-07-2014 04:33 AM

भाभी चीख उठीं- ऊ ऊई मर गई ! मर गई !
लेकिन अब वो बबलू के लंड की गुलाम थीं !
बबलू ने भाभी को चोदना शुरू कर दिया, उनकी अच्छी चुदाई हो रही थी, भाभी की आँखों से पानी आ रहा था, बबलू बीच बीच में तेज़ धक्कों से उन्हें चोद देता था।
ऊह्ह ऊई आः आहा आह मर गई मर गई जैसी आवाजें कमरे में गूंज रही थीं।
अमित ने भी मुझे अपने खड़े हुए लंड पर बैठा लिया अमित का लंड मेरी चूत में अंदर तक घुसा हुआ था। मैं भी धीरे धीरे चुदते हुए भाभी की चूत फाड़ चुदाई का मज़ा लेने लगी।
15 मिनट तक भाभी की लगातार चुदाई बबलू ने करी इसके बाद बबलू ने लंड निकाल लिया और भाभी को बाँहों में भरकर अपने से चिपका लिया।
भाभी बोलीं- चूत में दर्द तो हो रहा है लेकिन बबलू, मज़ा आ गया ! तीन बार मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया।
बबलू सीधा लेट गया और भाभी को अपना लौड़ा पकड़ा दिया जो पूरा दस इंची हवा में खड़ा हुआ था। अमित भी मेरी चोद चुका था, अमित ने वीर्य मेरी चूत में छोड़ दिया था। अमित बोला- मैं बाहर होकर आता हूँ !
अमित बाहर निकल गया, मैं खाट पर बैठी चोर नज़रों से बबलू का लंड देख रही थी।
बबलू बोला- शर्म छोड़ दे ! मज़े से खेल ! ऐसे चोरी चोरी से क्या देख रही है?
उसने मुझे अपने पास खींच लिया और लंड मेरे हाथ में पकड़ा दिया। बबलू अब दो नंगी औरतों को अपने से चिपका कर उनका शवाब पी रहा था।
मैं धीरे धीरे उसका लंड सहलाने लगी, भाभी बोलीं- कंचन, एक बार इस सांड का लंड अंदर घुसवा ले, बड़ा मज़ा आएगा। साला क्या चोदता है।
बबलू मेरे चूतड़ दबाते हुए बोला- कंचन जी, डाल दूँ? तुम्हारी जवानी तो मुझे पागल कर रही है।
उसने मेरी चूत में अपनी दो उंगलिया डाल दीं थीं, चूत अमित से चुदी हुई थी, पूरी वीर्य से नहा रही थी, उँगलियाँ आराम से घुस गईं।
चूत मसलते हुए बबलू बोला- गाड़ी तो तुम्हारी पूरी तैयार है, बस इंजन लगाने की देर है। चलो घोड़ी बन जाओ पीछे से धीरे धीरे प्यार से अपनी बीवी की तरह चोदूँगा और चुदते हुए नखरे करे तो रंडी की तरह बजा कर चूत की भोंसड़ी बना दूँगा। चुदने के बाद अगर मज़ा नहीं आए तो जो चाहे सजा दे लेना।भाभी उठीं और बोलीं- चल अब घोड़ी बन जा ! इतने प्यार से कह रहा है तो पूरे मज़े भी देगा।
मैं जमीन पर कोहनी के बल घोड़ी बन गई, बबलू ने अपना लंड पीछे से आकर मेरी चूत पर कई बार फिराया। मेरी सांसें तेज़ हो गईं, मैं लंड अंदर घुसने का इंतजार करने लगी। बड़े प्यार से चूत पर सुपाड़े को अपने हाथ से दबाते हुए बबलू ने अपना लंड मेरी चूत में प्रवेश कराया और मेरी चूचियों और चुचूकों को मसला।
बबलू अपने लंड को मेरी चूत में चलाना शुरू कर दिया, मेरी चुदाई शुरू हो गई थी। बबलू धीरे धीरे प्यार से चोद रहा था, लंड उसने पूरा नहीं घुसा रखा था लेकिन उसकी मोटाई ने मेरी चूत पूरी फाड़ के रख दी थी, मैं एक बकरी की तरह ऊह आह आह आह कर रही थी लेकिन इंजन अच्छा हो तो सफ़र भी मस्त होता है।
थोड़ी देर में मेरी चुदाई मुझे बड़ा आनन्द देने लगी, अब मैं चुदते हुए आह ऊह आहा आहा आहा और चोद ! और चोद ! चिल्लाने लगी।
बबलू ने मेरी गेंदें पकड़ी और उन्हें मसलते हुए अपनी चुदाई की स्पीड बढ़ा दी। लंड अब पूरा अंदर घुस कर मेरी गर्भाशय की दीवारों से टकरा रहा था और आगे पीछे हो रहा था।
5 मिनट में बबलू ने मेरी फाड़ कर रख दी थी, मैंने 2 बार पानी छोड़ दिया था। इसके बाद वो हट गया। मेरी चूत फट गई थी और दर्द कर रही थी, मैं सीधी टांगें फ़ैला कर लेट गई। भाभी अपनी चूत चौड़ी करके जमीन पर पड़ी हुई थीं, बबलू ने कुछ धक्के उनकी चूत में मारे और उसके बाद दोबारा मेरी चूत में लंड पेल दिया, बोला- अपना वीर्य तो तुम्हारी चूत में ही डालूँगा।
मेरी चूत में 2-3 धक्कों बाद बबलू का पूरा वीर्य मेरी चूत में भर गया। मेरे पूरे गर्भ में वीर्य की बाढ़ आ गई। अगर मैंने गोली नहीं खाई होती तो पक्का गर्भ से हो गई होती।
इसके बाद हम दोनों उससे चिपक गए और 15 मिनट तक चिपके रहे। लंड बबलू का बड़ा और मोटा था लेकिन उसने मुझे आनन्द बहुत दिया। उसने मुझे वास्तव मैं प्यार से चोदा था।
कुछ देर बाद अमित बाहर से खाना लेकर आ गया हम लोगों ने खाना खाया। रात का एक बज रहा था। हम लोग लखनऊ के लिए चल दिए।
दो बजे हम भाभी के फ्लैट मैं थे, जाते ही सब लोग सो गए मैं और भाभी साथ साथ सोई।
सुबह 6 बजे अलार्म से सब लोग उठे।
मैं बोली- भाभी अब पेपर देने का मन नहीं कर रहा, अब तो बस लंडों से खेलने का मन कर रहा है, सुबह से ही चुल उठ रही है, बबलू की याद आ रही है, रात चुदने में मज़ा आ गया।
भाभी बोली- तुझे और लंड मस्ती चाहिए तो कुछ और करें?
मैंने कहा- कुछ और क्या?
भाभी ने धीरे से कहा- मेरे पति के यार सतीश लखनऊ में हैं, मस्त चोदते हैं, मेरी उनसे अच्छी यारी है, मैं पहले भी 3-4 बार उनसे चूत और गांड मरवा चुकी हूँ। तू हाँ करे तो रात को तुझे उनके लंड का का मज़ा और दिला दूँ। अमित और उनके लंड साथ साथ मुँह चूत, और गांड में डलवाना, दो-दो लंडों से खेलने में बड़ा मज़ा आएगा।
मैंने कहा- अमित ऐसा करेगा?
भाभी हँसते हुए बोलीं- अमित बहुत हरामी है, उसको मैंने कई लड़कियों की चूत दिलाई है, बहुत बड़ा चोदू है। एक बार तो उसने अपने दो दोस्तों के साथ मेरी चोदी थी, तीन तीन लंड एक साथ मेरे मुँह, चूत और गांड में घुस गए थे। और तू कौन सी उसकी सगी भाभी है। उसकी सगी चाची, जब चाचा के साथ शादी के बाद आई थीं तो चाची की चोदने को उतावला हो रहा था, मैंने चाचा के रहते उसे चाची की चूत छुपकर चालाकी से दिलवा दी थी, बात चूत चुदाई की हुई थी लेकिन कुत्ते ने गांड मारे बिना चाची को नहीं छोड़ा। बस तुझे हाँ करनी है, तेरी हाँ के बिना मैं तुझे दूसरे आदमी से नहीं चुदवाऊँगी।
तभी अमित आ गया, भाभी बोलीं- अभी 7 बज रहे हैं, जाने से पहले सोच कर बता देना।
भाभी की बातों से मेरे मन में एक तूफ़ान सा आ गया था, दो-दो लंड एक साथ घुसने की सोच कर ही चूत फड़कने लगी लेकिन एक डर भी लग रहा था। आखिर जीत भाभी की हुई। जाने से पहले मैंने उनको हाँ बोल दिया। अमित मुझे परीक्षा भवन में छोड़ आया।
वहाँ मैं पूरे समय यही सोचती रही कि दो दो लंडों से चुदूँगी तो कैसा लगेगा। सोच सोच कर चूत गीली हो रही थी। वाकई यह तो मेरी हसीन चुदाई यात्रा थी, रोज़ नई नई तरह के सेक्स का आनन्द मिल रहा था। परीक्षा भवन में 45 साल के मास्टरजी ड्यूटी दे रहे थे, मेरा मन कर रहा था कि मास्टर जी से भी चुदवा लूँ। रंडी प्रवृति मेरे ऊपर हावी थी !
किसी तरह पेपर खत्म हुआ, अमित मुझे लेने आ गया। कार मैं बैठकर उसने मेरी चूचियाँ मसलीं और बोला- भाभी ने मुझे सब बता दिया है, आज रात तुम मस्त हो जाओगी। सतीश और मैं दो बार पहले भाभी और सतीश की चचेरी बहन को एक साथ चोद चुके हैं, मस्त मज़ा आता है। तुम्हारे साथ तो मज़ा आ जायेगा।
मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था कि तुम्हारी गांड नगरी में भी एंट्री मिलेगी। सेक्सी बातें करते हुए अमित मुझे साथ लेकर भाभी के फ्लैट पर आ गया।
शाम को 6 बजे सतीश आ गया, भाभी ने सतीश से मुझको मिलवाया। सतीश ने मुझे बाँहों में भरा और धीरे से मेरे होंठ चूसते हुए बोला- आप बहुत सुंदर हैं।
हम सब लोग आधे घंटे बातें करते रहे, मैं सतीश के पास बैठी थी। नॉन-वेज बातें शुरु हो गई थीं।



RE: दुल्हन की तरप - rajbr1981 - 14-07-2014 04:34 AM

भाभी बोलीं- सतीश को घोड़ी की सवारी बहुत पसंद है।
अमित बोला- सतीश संतरियों का रस पीकर घोड़ी बहुत अच्छी दौड़ाता है।
भाभी हँसते हुए बोलीं- कंचन के पास दो संतरियाँ रखी हुई है, सतीश जी उनका जूस निकाल लो।
सतीश ने मेरे स्तनों को ऊपर से दबाते हुए कहा- आपकी संतरियाँ तो बहुत रसीली लग रही हैं।
मुझसे रहा नहीं गया, मैं बोली- पहले भाभी की पाव रोटी खा लो, पूरी मक्खन से गीली कर रखी हुई है।
बातें करते करते हम सब गरम हो रहे थे, अमित ने भाभी के पेटीकोट में हाथ डाल दिया और बोला- रजनी भाभी की पाव रोटी तो मैं खाऊँगा।
सतीश मेरी चूत ऊपर से सहलाते हुए बोला- आपकी पाव रोटी पर मक्खन हम लगा देंगे।
भाभी बोलीं- अब तू जाकर नहा ले और अपनी पाव रोटी गर्म कर, उसके बाद मक्खन सतीश से लगवा लेना, यह अच्छा लगाता है।
सतीश मेरी पजामी के ऊपर से मेरी चूत सहला रहा था, मुझसे बोला- आओ नहाते हैं।
भाभी बोलीं- तू सतीश के साथ नहा ले, तब तक मैं और अमित बाहर घूम कर आते हैं। यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉंम पर पढ़ रहे हैं।
भाभी और अमित के जाने के बाद सतीश ने मुझे बाँहों मैं भर कर एक बड़ा लम्बा चुम्बन मेरे होंटों पर लिया और बोला- आप बहुत अच्छी लग रही हैं।
मैं थोड़ा संकुचा रही थी, सतीश बोला- आप और हम साथ नहाते हैं, इससे हमारे आपके बीच की दूरी मिट जाएगी।
मैं राज़ी हो गई अमित ने अपने कपड़े उतार दिए थे, अब वो सिर्फ एक चड्डी में था। उसने मेरी कमर में हाथ डाला और मेरा कुरता पजामा उतरवा दिया।
अब मैं उसके सामने एक पारदर्शी ब्रा और पैंटी मैं थी। उसने मेरी ब्रा के ऊपर से चूचियों पर हाथ फिराते हुए कहा- आपके कबूतर बहुत सुंदर हैं, आपकी आज्ञा हो तो इन्हें आजाद कर दूँ?
और उसने मेरी ब्रा का हूक खोल कर मेरे दोनों कबूतरों को आजाद कर दिया, फड़फड़ा कर दोनों कबूतर बाहर निकल आए।
सतीश ने दोनों कबूतरों की चोचें मुँह में लेकर उनको एक एक बार चूसा। मेरी चूत लसलसी होने लगी थी। हम दोनों बाथरूम में आ गए, सतीश ने शावर चला दिया और मुझे बाँहों में भर लिया, हम दोनों शावर में नहा रहे थे, हमारे बीच का अजनबीपन दूर होता जा रहा था। मेरे स्तन सतीश के सीने को छू रहे थे, वो नीचे झुका और मेरी नाभी चूसते हुए मेरी पैंटी पर आ गया। उसने अपने हाथों से मेरी पैंटी नीचे कर दी और बोला- अमृत का स्वाद तो ले लेने दो रानी !
और वो मेरी गीली चूत को चाटने लगा। मैं गर्म हो रही थी, ऊपर से ठंडे पानी ने मुझे गर्म कर दिया था, मुझे भाभी की बात सही लग रही थी। हर मर्द का मज़ा अलग होता है। मैं काम रस में नहाने लगी थी, मैंने अपने को हिला कर पैरों मैं पड़ी पैंटी अलग कर दी थी।
सतीश अब सीधा हो गया। उसने अपना अंडरवीयर उतार दिया। मेरी आँखों के सामने एक पतला लम्बा लंड खड़ा था। मेरी पीठ से चिपक कर मेरी संतरियों का मसल मसल कर रस निकाल रहा था। उसका नंगा लंड मेरी गांड से सटा हुआ था मेरी आह ऊह की आवाजें धीरे धीरे निकल रही थीं। सतीश ने मेरे चुचूक नोचते हुए पूछा- आगे से प्यार करवाना है या ऐसे ही अच्छा लग रहा है?
मैं बोली- अब लंड डालो, बड़ी प्यास लग रही है।
मुझे सतीश ने सीधा किया, बाँहों में भर लिया और कस कर भींच लिया। अब उसका लंड मेरी चूत के दरवाजे पर दस्तक दे रहा था। मैं भी उससे कस कर चिपक गई थी।
उसने मुझे अपने पैरों पर खड़ा कर लिया था और मुझे ऊपर की तरफ उठा कर धीरे धीरे हिल कर लंड मेरी चूत के होंटों में घुमा रहा था, सच में नया मज़ा था।
सतीश अब मेरा यार था। उसने मेरे होंटों पर पप्पी ली और बोला- अंदर डाल दूं मेरी जान?
मैंने मुस्करा कर आँखें बंद कर लीं।
सतीश ने मुझे चूतड़ों से पकड़ कर थोड़ा ऊपर उठाया और एक मंझे हुए खिलाडी की तरह खड़े खड़े ही अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया।
गहरी आह की आवाज़ से मैंने उसका स्वागत किया। मैं सतीश के पैर के ऊपर आराम से चिपके हुए खड़ी थे और उसका लंड मेरी चूत में घुसा हुआ था। अमित के लंड से बिल्कुल अलग एक मज़ा था। पतला लंड था लेकिन जिस तरह मेरी चूत में घुसा हुआ था वो अमित के लंड से कम मज़ा नहीं दे रहा था, साथ ही साथ मुझे सतीश के साथ आज रात मिलने वाले आनन्द का अहसास करा रहा था। मुझे पता चल गया था कि औरतें एक से जयादा लंड खाने के बाद लंड की शौकीन क्यों हो जाती हैं।
सतीश ने 2-3 मिनट बाद लंड निकाल कर मुझे गोद में उठा लिया और नहाने वाले स्टूल पर बैठ कर दुबारा अपना लंड मेरी चूत में घुसा दिया। सतीश ने मेरी टांगें अपने पीठ पर बांध लीं और नीचे से मेरी चूत को लंड से पेलने लगा। उसमें अच्छी ताकत थी, बैठे बैठे ही वो मुझे अच्छी तरह चोद रहा था। उसने मुझे मस्त कर दिया था। मेरे होटों पर होंठ रखे और पूछा- रानी, मज़ा आ रहा है? दर्द तो नहीं हो रहा?
मैंने उसे भींच लिया और बोली- आपने तो मस्त कर दिया ! आह, बहुत अच्छा लग रहा है, और चोदो ! आहहा बड़ा मज़ा आ रहा है।
उसने मेरे होटों पर होंठ रख दिये। 5 मिनट की चुदाई के बाद उसने मुझे सीधा किया और पीछे दीवार से टिककर मेरे को दुबारा लोड़े पर बैठा लिया मेरी गेंदें अब उसके हाथों में थीं, सामने शीशे में अपनी गेंदों की मसलाई और चुदाई देख रही थी। लौड़ा मेरी चूत चोद रहा था।
सतीश को शीशे में देखकर मैं मुस्कुराई, उसने अपना लौड़ा बाहर निकाला और बोला- शीशे में देखो लौड़ा कैसे अंदर घुसता है !
उसने दुबारा मेरी जांघें चौड़ी करके लौड़ा धीरे धीरे से मेरी चूत में घुसा दिया। शीशे में मेरी फ़ैली हुई टांगों के बीच लौड़ा घुसते देख मैं उत्तेजित हो गई थी। लौड़ा घुसने के बाद सतीश ने तेज धक्कों से मेरी चूत फाड़नी शुरू कर दी थी। मैं ऊह आह ऊह का हल्ला मचाती हुई चुदवाने लगी।
5 मिनट बाद मेरी चूत वीर्य से नहा गई। इसके बाद हम लोग 5 मिनट तक चिपक कर नहाए। नहाने के बाद मैंने सिर्फ छोटी स्कर्ट बिना पैंटी के और अमित ने नेकर पहन ली।
हम लोग कमरे में आ गए, बिस्तर पर लेट कर मैं और सतीश बातें करने लगे। सतीश मुझे इस समय एक अच्छा आदमी लग रहा था उसने मुझे अपना बना लिया था। मेरी शर्म पूरी दूर हो गई थी रात के 10 बज रहे थे, भाभी का फ़ोन आया कि वो लोग आ रहे हैं। भाभी और अमित साढ़े दस बजे आए।
मैंने और भाभी ने एक-एक जाम व्हिस्की का अमित और सतीश के लिए बनाया। मैं सतीश की जाँघों में और भाभी अमित की जाँघों पर नंगी होकर बैठ गईं। दोनों ने हमारी चूचियां और जांघें मसलते हुए हमें प्यार से रगड़ा और अपने जाम ख़त्म किये। हम सब लोगों ने उसके बाद खाना खाया। इसके बाद यह तय हुआ आज भाभी अमित के साथ और मैं सतीश के साथ सोऊँगी।
12 बजे मैं सतीश के कमरे में आ गई। सतीश से चिपक कर मैं लेट गई सतीश का नेकर मैंने उतार दिया और उसका लंड अपने हाथों में पकड़ लिया।
सतीश का लंड सहलाने में बड़ा आनन्द आ रहा था। सतीश मेरे बाल सहला रहा था, मैं चाह रही थी कि वो मेरी चुदाई करे लेकिन सतीश शांत लेटा हुआ था। उसका लंड पूरा कड़क हो रहा था।
मुझसे रहा नहीं गया, मैं बोली- सतीश चोदो ना मुझे ! मसल दो मुझे।
सतीश मुस्कराया और मेरे को सीधा करके बोला- कंचन, मेरी एक बात मानोगी?
मैंने पूछा- क्या?
“एक मिनट रुको, मैं बताता हूँ !”



RE: दुल्हन की तरप - rajbr1981 - 14-07-2014 04:35 AM

सतीश बाहर गया और एक पतला सा अपने लंड जितना लम्बा और लंड से थोड़ा मोटा बैंगन लेकर आया, बोला- प्लीज़ इसे अपनी चूत में डाल कर दिखाओ न। छोटेपन में एक बार मैंने अपनी मामी को चूत में बैंगन करते देखा था तबसे मुझे अपनी आँखों के सामने औरतों को बैंगन चूत में डलवाते हुए देखने में बड़ा मज़ा आता है। प्लीज़ करके दिखाओ न।
उसने मेरे हाथ मैं बैंगन पकड़ा दिया और मेरे गले में बाहें डालकर मेरे होंटों को चूसने लगा।
होंट चूसने के बाद सतीश बोला- रानी, मेरी इच्छा पूरी कर दो न?
मैंने कहा- ठीक है ! लेकिन किसी को बताना नहीं !
उसने हाँ में मुंडी हिलाई।
मैंने अपनी जांघें चौड़ी की और चूत में बैंगन घुसा लिया। पतला 7 इंची बैंगन बड़े आराम से अंदर तक घुस गया।
मैं अपनी टांगें फ़ैला कर चूत में बैंगन करने लगी, सतीश मुझे बैंगन करते हुए देख कर अपनी मुठ मारने लगा, उसे देखकर मैं मुस्करा रही थी, मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था।
5 मिनट बाद सतीश ने उठकर बैंगन निकाल कर एक तरफ़ रख दिया और मेरे गालों पर पप्पियों की बारिश कर दी। मैंने उसे चूत मारने का इशारा किया उसने मुझे तिरछा लेटा कर मेरी चूत में अपना लंड घुसा दिया और प्यार से मेरे गालों और चूचियों को सहलाते हुए मुझे चोदने लगा।
मेरी चुदाई यात्रा की गाड़ी अपने अगले पड़ाव की तरफ दौड़ने लगी।
थोड़ी देर बाद पलंग पर सीधा लेटा कर सतीश मुझे चोदने लगा। सतीश अमित से बड़ा चूत का खिलाड़ी था। एक कुशल खिलाड़ी की तरह वो चोदते हुए मेरे सारे अंगों से खेल रहा था। मेरी गेंदों की शामत आई हुई थी, सतीश एक हैवान की तरह मेरे स्तनों की मसलाई, चुसाई कर रहा था, मेरी चूत पानी छोड़ रही थी और उसका लंड मेरे चूत रस से नहा रहा था, लौड़ा पूरे जोश के साथ मेरी सुरंग चौड़ी करते हुए उसकी खुदाई चोद-चोद कर कर रहा था।
कुछ देर बाद सतीश लेट गया और मुझे उसने अपने ऊपर लिटा लिया। मैं उसके ऊपर लेटी हुई थी, मोटा लंड मेरी चूत में अब आराम कर रहा था, शायद अगले हमले की तैयारी में था। उसका हाथ मेरे चूतड़ों पर घूम रहा था। उसने मेरी गांड में अपनी दो उँगलियाँ घुसा कर गांड चौड़ी की और साइड में पड़ा हुआ बैंगन मेरी गांड में डाल दिया।
मुझे तेज दर्द सा हुआ।
सतीश ने मुझे एक हाथ से कसकर दबा रखा था, थोड़ी देर में सात इंची पतला बैंगन मेरी गांड में घुस चुका था, मेरी आँखों में पानी आ रहा था। मैं सतीश पर चिल्ला रही थी- कुत्ते ! बाहर निकाल ! दर्द हो रहा है।
लेकिन सतीश ने मुस्कराते हुए मुझे अपनी बाँहों में भर लिया और तिरछा कर दिया। बैंगन गांड में, लंड चूत में था। अमित ने लंड बाहर निकाल लिया और 3-4 बार मेरी गांड में बैंगन आगे पीछे किया, इसके बाद उसे बाहर निकाल लिया और मुझे प्यार करने लगा।
उसका लंड तना हुआ था। उसने 10 मिनट बाद लंड फिर चूत में डाल दिया और मुझे चोदना शुरू कर दिया, थोड़ी देर में उसने वीर्य मेरी चूत में उड़ेल दिया था, पूरी चूत वीर्य से नहा गई सतीश का वीर्य मेरी चौड़ी और खुल चुकी चूत से बाहर बह रहा था। मैं आनन्द से नहा गई, इतने आनन्द की तो मैंने कल्पना भी नहीं की थी। मैं सतीश से चिपक गई।
उसने दुबारा मेरी गांड में बैंगन आगे पीछे करना शुरू कर दिया। मुझे दर्द हो रहा था लेकिन उसने मुझे अपनी बाँहों में दबा रखा था। दस मिनट के बाद उसने मेरा गाण्ड से बैंगन निकाला तो मुझे बड़ी राहत मिली।
सतीश बोला- आओ अब एक एक छोटा पेग व्हिस्की का लेते हैं।
हम दोनों ने एक एक छोटा पेग व्हिस्की का लिया। कुछ देर बाद मैं नशे में थी।
सतीश बोला- एक एक राउंड और हो जाए? तुम मेरा लोड़ा चूस कर खड़ा करो, एक बार और तुम्हें चोदना है।
सतीश की मर्दानगी में कुछ बात थी, मैं मना नहीं कर पाई और नशे मैं उसका लौड़ा चूस कर मैंने खड़ा कर दिया। उसने खड़े होकर लौड़े पर तेल लगाया और मुझे उल्टा कर दिया मुझे लगा पीछे से वो मेरी चूत मारेगा।
सतीश ने मेरे पेट के नीचे दो तकिए रखे और मेरी टाँगें चौड़ी कर मेरी चूत में अपना लंड घुसा कर 3-4 धक्के मारे। इसके बाद उसने लंड का सुपारा मेरी गांड के मुँह पर रख दिया। मेरी गांड में उसका लंड छू रहा था, उसने अपने हाथों से मेरी गांड में अपना सुपारा घुसा दिया। मैं उई करते हुए उछल पड़ी, उसका लंड फिसल गया। हम दोनों नशे में थे। उसने मुझे धक्का देकर बिस्तर पर गिरा दिया और मुझे दबा कर अपना लंड मेरी गांड पर मारा तो लंड का सुपारा गांड में प्रवेश पा गया।
सतीश औरतों की मारने में खिलाड़ी था। इस बार उसने मुझे उचकने का मौका नहीं दिया और मेरी पीठ पर अपने हाथों का जोर डाल दिया और चिल्लाते हुए बोला- रंडी, साली ! मज़े भी करने हैं और रो भी रही है? प्यार से ठोक रहा हूँ तो नखरे कर रही है? आज तक जिस पर भी चढ़ा हूँ, गांड फाड़े बिना नहीं छोड़ा है उसे !
और वो पूरी ताकत से अपना लंड मेरी गांड में ठूंसने लगा।
मैं जोर से चिल्ला रही थी- उई मर गई ! मर गई, छोड़ो सतीश, छोड़ो !
लेकिन औरतों की चूत से खेलने वाले खिलाडियों को पता होता है कब मारनी है और कब प्यार करना है इस समय मेरी मारी जा रही थी, सतीश लंड पेलता जा रहा था और बोलता जा रहा था- रंडी, साली ! रो क्यों रही है? मज़े कर एक बार गांड का मज़ा ले लोगी फिर चूत मराने का मन नहीं करा करेगा।
सतीश ने अपना लंड पूरा ठोक कर मेरी गांड में घुसा दिया मेरी आँखों में आँसू आ गए थे। उसने अब अपने हाथ मेरी पीठ से हटा लिए थे लेकिन अब मेरी गांड उसके लंड के कब्जे में थी, मैं छुतने की कोशिश कर रही थी लेकिन अब कोई फायदा नहीं था। उसने मेरे बालों को सहलाया और बोला- अब एक अच्छी औरत की तरह गांड ढीले छोड़ो, जब गांड चुदेगी तो वैसा ही मज़ा आएगा जैसे कि चलती गाड़ी में हवा लगती है।
मरती क्या नहीं करती ! मैंने अपनी गांड ढीली छोड़ दी।
सतीश ने मेरी कमर अपने दोनों हाथों से पकड़ कर गांड में गाड़ी दौड़ानी शुरू कर दी थी। मेरी चीखें निकल रही थीं, मेरी गांड मारी जा रही थी। कुछ धक्कों के बाद मुझे मज़ा आ रहा था लेकिन दर्द बहुत हो रहा था। बीच में सतीश ने मेरे चूचे पकड़ लिए थे और अब वो धीरे धीरे चोद रहा था। मेरी गांड फट गई थी !
5 मिनट के बाद सतीश ने अपना वीर्य गांड में छोड़ दिया। मेरी गांड की सुहागरात पूरी हो गई थी। सुबह के 2 बज रहे थे सतीश ने बाँहों में भरा और बोला- तकलीफ हुई उसके लिए माफ़ी। सुबह उठोगी तो बहुत अच्छा लगेगा।
मैं लेट कर सो गई।
अगले दिन दोपहर एक बजे नींद खुली मेरी गांड बहुत दुःख रही थी। उठकर भाभी के कमरे में झांक कर देखा तो भाभी और अमित नंगे सो रहे थे।
मैंने भाभी को उठाया, आँख मलते हुए भाभी उठीं, भाभी लंगड़ा रही थीं, बोली- 4 बजे सो पाई हूँ, अमित ने कल गांड की माँ चोद दी, दो बार चढ़ा साला ! बड़ा दर्द हो रहा है !
मुझे भी लंगड़ाते हुए देख कर बोलीं- वाह, तेरी गांड की भी सुहागरात मन गई। सतीश ने तो आज तक जो भी लोंडिया मिली है बिना गांड मारे नहीं छोड़ा है।
हम लोग बातें करते हुए बाथरूम में आ गई, साथ नहाते हुए हम दोनों ने एक दूसरे की गांड पर दवाई लगाई।
भाभी बोली- चल अच्छा है, तेरी गांड खुल गई। अब किसी मोटे लंड वाले से गांड चुदेगी तो दर्द ज्यादा नहीं होगा। यह अमित भी बड़ा हरामी है, तेरी गांड मारे बिना तुझे दिल्ली नहीं जाने देगा। साले का लंड भी मोटा है। एक बार अपनी कामवाली की कुंवारी गांड में डाल दिया था, बेचारी बेहोश हो गई थी, बड़ी मुश्किल से बीस हजार में मामला निपटा था। अब तेरी गांड खुल चुकी है, अमित का लंड तो घुस जाएगा लेकिन मज़े वाला दर्द भी बहुत होगा। साले को ठीक से गांड मारनी आती भी नहीं, लेकिन मज़ा अच्छा देता है।
हम दोनों नहाने के बाद अपने कुत्तों के लिए नाश्ता बनाने लगे।
3 बजे नाश्ता खाकर हम लोग बाज़ार घूमने चले गए। बाज़ार से खाना खा पीकर 9 बजे हम लोग लौटे।
पता नहीं अमित और सतीश ने आपस में क्या बात चीत की, कहने लगे कि हम दोनों को दो दिन के लिए बनारस जाना है। दोनों रात को बनारस चले गए, मैं और भाभी रात में गहरी नींद सोए, सुबह हम दोनों तरो ताज़ा थी, हम दोनों को बड़ा अकेला अकेला सा लग रहा था।
मैंने अपनी गांड की सुहागरात की पूरी कहानी भाभी को सुनाई। अगली रात को चूत कुनमुना रही थी, गांड में भी खुजली हो रही थी, दोनों सहेलियाँ लंड मांग रही थीं। भाभी और मैं नंगी होकर ब्लू फिल्म देखते एक दूसरे की चूत और चूचियों से रात 12 बजे तक खेलती रहीं। भाभी ने मुझे 2×2 खेल के लिए तैयार कर लिया था।
अगले दिन मुझे सतीश और अमित की याद आ रही थी। शाम को दोनों लोगों को वापस आना था और आज रात हम चारों को एक साथ सेक्स का खेल खेलना था, एक डर सा लग रहा था लेकिन यह सोचकर कि जब इतनी रंडीबाजी कर ली है तो यह भी सही ! दोबारा मौका मिले या नहीं ! घर जाकर तो गाज़र-मूली ही चूत में डालनी पड़ेगी।




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